5 सितंबर 2025 को राज्य में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का अलर्ट है। 9 सितंबर तक अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश जारी रहने की भविष्यवाणी है। जानिए आज कहां कैसा मौसम रहेगा।

VSCHAUHAN FOR NewsExpress India

उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। इस साल मॉनसून ने पहाड़ों पर जमकर कहर बरपाया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज भी बादल गरज-चमक के साथ मेहरबान होने वाले हैं।

उत्तराखंड के ज्यादातर इलाकों में आज हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ कुछ जगहों पर भारी वर्षा की संभावना है। IMD की चेतावनी के मुताबिक, देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल जैसे जिलों में तीव्र बारिश के स्पेल देखने को मिल सकते हैं, जहां बिजली चमकने और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। तापमान की बात करें तो मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य रहते हुए 28-32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में यह 20-25 डिग्री तक गिर सकता है। न्यूनतम तापमान सामान्य से थोड़ा नीचे, यानी पहाड़ों में 15-18 डिग्री रहने की उम्मीद है। हवा की रफ्तार 40-50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

पांच दिनों तक जारी रहेगी बारिश

उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अभी भी पूरी ताकत से सक्रिय है। अगस्त 2025 में औसत से ज्यादा 84.1 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य 73.4 मिमी से ऊपर है। 2 सितंबर को तो कुछ जगहों पर 12-20 सेमी तक भारी वर्षा हुई, जो हिमाचल और उत्तराखंड में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर गई। सितंबर के पहले हफ्ते में मॉनसून की वापसी के संकेत अभी नहीं दिख रहे; बल्कि 4 से 9 सितंबर तक अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश जारी रहने की भविष्यवाणी है। IMD का अनुमान है कि अगले 5 दिनों में राज्य में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक बनी रहेगी।

टिहरी बांध की झील अपनी अधिकतम क्षमता 830 आरएल (रीवर लेबल) पानी भरने की क्षमता अगले चार-पांच दिन में पूरा कर लेगी। झमाझम बारिश से टिहरी झील पानी से लबालब हो गई है। इन दिनों भागीरथी और भिलंगना नदी से 900 क्यूमेक्स पानी प्रतिदिन झील में आ रहा है। अधिक पानी आने से टीएचडीसी को बांध के ऊपरी हिस्से में बनाए गए दो अनगेटेड साफ्ट स्पिलवे से पानी छोड़ना पड़ रहा है। झील से टीएचडीसी 800 क्यूमेक्स पानी का डिस्चार्ज कर रही है।

वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील बनकर तैयार हो गई थी। 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में झील बनने के बाद वर्ष 2010 और 2013 में झील में सबसे अधिक पानी आया था। अधिक पानी छोड़ने के लिए टीएचडीसी को स्पिलवे से पानी छोड़ना पड़ा था। टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक एलपी जोशी ने बताया कि टिहरी झील को 830 मीटर तक भरने की अनुमति प्राप्त है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *