पिछले दिनों सेलाकुई क्षेत्र में पुलिस द्वारा करवाई, “पनीर ,दही “मामले में प्रक्रियात्मक खामियों और लापरवाही के कारण विभाग की किरकिरी।

कुछ दिनों पहले सेलाकुई क्षेत्र में पुलिस द्वारा करवाई’खराब पनीर ’ मामला अब पुलिस प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है। इस मामले में बरती गई प्रक्रियात्मक खामियों और लापरवाही के कारण विभाग की भारी किरकिरी हुई, इस मामले में जिनको आरोपी बनाया गया उनके द्वारा आईजी सदानंद दाते के समक्ष शिकायत करते हुए उन्होंने अपनी पीड़ा बताई जिसके बाद प्रभारी आईजी रेंज सदानंद दाते के निर्देशानुसार की जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़ी कार्रवाई की गई है। पीड़ित शिकायतकर्ताओं के अनुसार सोमवार को वरिष्ठ उप निरीक्षक (SSI) जितेंद्र कुमार और उनके साथ तीन अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया । इन पर आरोप है कि इन्होंने छापे की कार्रवाई के दौरान निर्धारित मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।

क्या था पूरा मामला?

​कुछ दिनों पहले पुलिस के अनुसार सेलाकुई पुलिस और एफडीए (FDA) की टीम ने एक संयुक्त कार्रवाई में एक दुकान से 250 किलो पनीर और 50 किलो दही बरामद किया था।​स्वास्थ्य विभाग ने मौके पर ही उस पनीर को ‘बदबूदार और खराब बताते हुए नष्ट कर दिया था।

दूसरी तरफ ​दुकानदार (पीड़ित पक्ष) ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए पुलिस पर उत्पीड़न और प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसकी शिकायत पुलिस मुख्यालय में की गई थी। उन्होंनेेेे बताया कि दिनांक 2.2 .2026 को सेलाकुई पुलिस के द्वारा गलत तरीके से फर्जी कार्रवाई कर मेरी गाड़ी को सीज किया गया एवं मेरी जीएसटी बिल वाली दही को नकली बताकर कार्रवाई की गई। उनकी पूरी कार्रवाई का वीडियो सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुआ इसके बाद मेरे द्वारा प्रभारी आईजी रेंज श्रीमान सदानंद दाते को मेरे द्वारा शिकायत की गई तथा उनके द्वारा तुरंत इस  घटना पर संज्ञान लेते हुए सेलाकुई पुलिस थाने के उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार एवं तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया ।

आरोपी के अनुसार सेलाकुई पुलिस द्वारा नियमों के अनदेखी कर मेरे थाने में बैठे होने के बावजूद एवं कार थाने परिसर में खड़ी होने पर भी कार का चालान ओवर स्पीड एवं सीट बेल्ट जैसे गंभीर धाराओं में कर 28,500 रुपए का चालान फर्जी तरीके से मेरा किया गया इतनी अधिक धनराशि का चालान शायद ही उत्तराखंड में किसी पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया हो? जो अधिकारी की मंशा पर प्रश्न चिह्न खड़े करता है मुझे 10:00बजे थाने में कमरे में बैठा दिया गया था तथा बाद में लगभग ढाई से 3:00 बजे के बीच मेरी कार से धूलकोट तिराहे पर पुलिस के अनुसार फर्जी कहानी बनाकर नकली दही बरामद की गई एवं सेंपलिंग की गई जबकि सत्यता यह है कि पुलिस द्वारा सैंपलिंग थाने पर की गई मैं व मेरी कार 4:00 बजे तक थाने में थे यानी की रिकवरी फर्जी थी एक और गंभीर प्रश्न यह है कि धारा 105 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के अंतर्गत पुलिस जब भी जब्ती एवं तलाशी की प्रक्रिया करती है तो वीडियोेाग्राफी फोटोग्राफी अनिवार्य है अन्यथा रिकवरी फर्जी मानी जाती है पुलिस द्वारा इस प्रकार की किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया ।

जब मैं (पीड़ित)एवं अन्य व्यक्ति 10 से 4 बजे तक थाने में थे तो हमारे गाड़ियों में पनीर पनीर और दही कहां से आया जबकि टीम द्वारा मौके पर ही सैंपलिंग करनी चाहिए थी 5 घंटे तक इनके द्वारा डेरी प्रोडक्ट दही आदि को धूप में खड़ी गाड़ी में रखा गया जिससे उनकी प्रकृति पर प्रभाव पड़ना लाजमी है या फिर ऐसा भी हो सकता है कि जितेंद्र आदि द्वारा  मूल दही पनीर आदि को बदल दिया हो क्योंकि गाड़ियां इन्हीं के कब्जे में थी यह पुलिस की पूरी कार्रवाई बहुत ही अधिक संदेहास्पद  अधिक लगती है।

दूसरी तो पुलिस द्वारा बताया गया था

”स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ नियमानुसार कार्रवाई की गई थी। जहाँ तक सीसीटीवी फुटेज का सवाल है, उसमें पनीर वापस गाड़ी में रखवाया जा रहा था। पनीर के सैंपल लैब भेजे गए हैं, रिपोर्ट का इंतज़ार है।”       — अजय सिंह, एसएसपी देहरादून

​इस मामले में एक CCTV फुटेज सोशल मीडिया और जांच टीम के सामने आया, जिसने पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। फुटेज के आधार पर यह दावा किया गया कि दुकान के बाहर रखा पनीर वापस गाड़ी में रखवाया जा रहा था, जबकि पुलिस का कहना था कि यह पनीर गाड़ी से बरामद किया गया था। इस विरोधाभास ने पुलिस की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना दिया।

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