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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून न सिर्फ पर्यटन का अहम केंद्र है, बल्कि यहां से होकर राज्य के कई जिलों तक पहुंचा जा सकता है. हर साल हजारों पर्यटक यहां घूमने आते हैं. लेकिन अब देहरादून आने वाले लोगों को पहाड़ की संस्कृति, स्वाद और कला को भी करीब से जानने का मौका मिलेगा9 दरअसल, भारत सरकार की ‘वन स्टेशन, वन प्रोडक्ट’ (One Station One Product Scheme) योजना के तहत देहरादून रेलवे स्टेशन पर एक खास कियोस्क लगाया गया है, जहां उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद और हैंडीक्राफ्ट्स एक ही छत के नीचे मिल रहें हैं.
लोकल प्रोडक्ट्स को मिलेगा नया बाजार
देहरादून रेलवे स्टेशन पर लगे इस कियोस्क में प्रदेशभर से लाए गए उत्पाद मिलते हैं. इस दुकान के संचालक इरफान बताते हैं कि उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद न सिर्फ यहां के लोगों के लिए खास हैं, बल्कि बाहर से आने वाले सैलानियों को भी काफी पसंद आते हैं. यहां पर माल्टा, कीवी, सेब और बुरांश जैसे फलों से बने स्क्वैश और जूस खरीदे जा सकते हैं. इसके अलावा देहरादून की प्रसिद्ध लीची का स्वाद भी अब ऑफ-सीजन में भी लिया जा सकता है.
जो लोग शहरों में रहकर अपने गांवों के पहाड़ी स्वाद को मिस करते हैं, उनके लिए भट्ट, राजमा, गहथ और कुल्थ जैसी दालें भी इस कियोस्क पर उपलब्ध हैं. मोटे अनाज और पहाड़ी मसालों का स्वाद भी अब दूर नहीं रहेगा. ये सभी प्रोडक्ट्स न सिर्फ टेस्टी हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं.
इस कियोस्क पर सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले उत्पाद वुडन हैंडीक्राफ्ट हैं, जो पहाड़ी इलाकों की महिलाओं और किसानों द्वारा बनाए जाते हैं. इनमें हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली लकड़ी का इस्तेमाल होता है. लकड़ी से बनी चूड़ियां, इयररिंग्स, की-चेन, घड़ियां, ज्वेलरी बॉक्स, ड्राई फ्रूट बॉक्स और अन्य सजावटी सामान यहां 30 रुपये से शुरू होकर कई वैरायटी में उपलब्ध हैं.
इरफान बताते हैं कि सालभर में इस कियोस्क से करीब 5 से 6 लाख रुपये का टर्नओवर हो जाता है. खर्च निकालने के बाद अच्छी खासी आमदनी भी होती है. साथ ही यह प्लेटफॉर्म राज्य के उन ग्रामीण लोगों के लिए भी रोजगार का माध्यम बन गया है जो पारंपरिक उत्पादों को बनाकर शहर तक पहुंचा नहीं पाते थे.
