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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अंग्रेजी शासनकाल में कई विकास के प्रयास किए गए. इनमें नहरों का निर्माण करवाना भी एक काम था. देहरादून में सबसे पहली नहर रानी कर्णावती ने बनवाई थी. इसके बाद अंग्रेजों ने सिंचाई और पेयजल की पूर्ति के लिए इन्हें बनवाया था, लेकिन धीरे-धीरे यह विलुप्त हो गई या इन पर सड़के बनवा ली गई. आज क़ई जगहों का नाम नहरों और पानी के स्रोतों पर ही रखा गया है जैसे नहर वाली गली, कैनाल रॉड, ईस्ट कैनाल रॉड, धारा चौकी और नालापानी आदि. देहरादून के रहने वाले अमित कौशिक ने बताया कि देहरादून में कई नहरें हुआ करती थीं और वह रविवार के दिन गर्मियों में नहाने के लिए जाते थे, लेकिन आज इन नहरों पर सड़कें बनवाई गई हैं.
17वीं सदी में शुरू हुई थी देहरादून की नहरों की कहानी
मानव सभ्यता के अतीत को देखते हैं, तो मोहनजोदड़ो हो या हड़प्पा सभ्यता हो, मानव सभ्यताओं के विकास में नदी-नहरों ने योगदान दिया है. कभी देहरादून को नहरों का शहर कहा जाता था और सिंचाई से लेकर जल आपूर्ति के लिए नेहरें ही सबसे अहम जरिया हुआ करती थीं, लेकिन देहरादून शहर को विकसित और आधुनिक बनाने के लिए इन नहरों को भेंट चढ़ना पड़ा.
मसूरी की तलहटी से रिस्पना नदी तक का सफर नहरें करती थीं. आज रिस्पना नदी नाले में तब्दील हो चुकी है, लेकिन कभी ऐसी कल्पना नहीं की गई थी कि जिन नहरों को राजतंत्र और ब्रिटिश काल में बनाने के लिए कोशिशें की गई वे लुप्त हो जाएंगी या नजर नहीं आएंगी. 17वीं सदी में शुरू हुई देहरादून की नहरों की कहानी साल 2007 में खत्म हुई.
रानी कर्णावती ने बनवाई थी पहली नहर
देहरादून की प्रसिद्ध इतिहासकार डॉक्टर शिव प्रसाद डबराल की किताब ‘गढ़वाल का इतिहास’ में उन्होंने रानी कर्णावती और उनके द्वारा निर्माण करवाई गई नहर का जिक्र किया है. सबसे पहले 17 वीं सदी में रानी कर्णावती ने ही देहरादून की पहली नहर बनवाई थी जो राजपुर से शुरू हुई थी. इसके बाद कटापत्थर नहर, धर्मपुर नहर, खलंगा नहर बनवाईं गई. 34 किमी लंबी राजपुर नहर को 4 साल में तैयार किया गया था जिसकी साफ सफाई की जिम्मेदारी गुरु राम राय दरबार साहिब के महंतों को दी गई. इसके बाद अंग्रेजों के शासनकाल में भी नेहरों का निर्माण करवाया गया. अंग्रेज अधिकारी इंजीनियर प्रोवी कॉटली ने नहरें बनवाई थीं.
क्या है ‘नहर वाली गली’ का इतिहास
राजपुर, मसूरी की तलहटी से शुरू नहर को रानी कर्णावती के शासनकाल में डायवर्ट किया गया और यह इसके बाद यह राजपुर से दिलाराम चौक और यहां से पूर्वी शाखा में बांट दी गई जो सर्वे चौक, धर्मपुर से होते हुए रिस्पना तक गई और वहीं मुख्य नहर राजपुर से होते हुए घण्टाघर और पलटन बाजार में पहुंची. जहां आज भी जगह का नाम “नहर वाली गली” कहा जाता है.
अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में नजर आती हैं नहरें
राजपुर से दिलाराम तक आई नहर ‘कैनाल’ को साल 2007 में अंडरग्राउंड कर इस पर रोड बना दिया गया, जिसका नाम कैनाल रोड रखा गया. वहीं इन नहर की पूर्वी शाखा को सर्वे चौक तक पहुँचाया गया. इसे भी अंडरग्राउंड करके सड़क बनवाई गई जिसे आज ईसी रोड यानी ईस्ट कनाल रोड कहा जाता है. इसी तरह घंटाघर के नजदीक आप धारा चौकी को देखते होंगे, आज जहां पुलिस चौकी है वहां कभी धारा बहा करती थी. इसी तरह नहरों के इतिहास को समेटे हुए दून घाटी की कई नहरें अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में ही नजर आती हैं और इन पर हमें सिर्फ जगहों के नाम दिखाई देते हैं.
